تازہ ترین

2023 के मदरसा सत्यापन पर बड़ा सवाल - बाराबंकी से आजमगढ़ तक कैसे पास हुए फर्जी कागज?

फाइलों में मानक, जमीन पर खेल - 2023 का मदरसा वेरिफिकेशन कठघरे में

تعلیم و تربیت 📅 26-09-2026 👁 9 views 💬 0 comments 🔁 1 shares
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यानुदानित मदरसों के वर्ष 2023 में हुए विभागीय सत्यापन पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शासन के निर्देश पर गठित जिला स्तरीय समितियों ने जिन मदरसों को जमीन, भवन और मानकों पर सही बताया था, अब उन्हीं मदरसों की जांच में फर्जीवाड़े और राजस्व विसंगतियों के आरोप सामने आ रहे हैं।

ताजा मामलों ने पूरे सत्यापन तंत्र की कार्यप्रणाली पर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

तीन जिलों में तीन बड़े खुलासे

1. बाराबंकी - दारुल उलूम पीरबटावन: तहसीलदार नवाबगंज की जांच रिपोर्ट में इस राज्यानुदानित मदरसे की भूमि को सरकारी/नजूल भूमि से जुड़ा बताया गया है। सवाल है कि जब राजस्व अभिलेखों में जमीन की स्थिति पहले से दर्ज थी, तो 2023 के सत्यापन में समिति ने इसे कैसे अनदेखा कर दिया।

2. आजमगढ़ - जामिया नूरुल उलूम मुबारकपुर: यहां मामला मान्यता के दस्तावेजों से जुड़ा है। मदरसा शिक्षा परिषद ने दस्तावेजों में गंभीर गड़बड़ी मानते हुए FIR दर्ज कराने तक के निर्देश दे दिए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि विवादित कागजों पर मान्यता का सत्यापन किस आधार पर हुआ था।

3. कुशीनगर - अंजुमन इस्लामिया फैजुल उलूम: इस मदरसे समेत कई अन्य संस्थानों के खिलाफ भी इसी तरह की शिकायतें और जांचें सामने आ रही हैं।

सत्यापन या सिर्फ खानापूर्ति?

विभागीय फाइलों में ये मदरसे अपनी निजी जमीन पर और सभी मानकों पर खरे दिखते हैं, लेकिन जब मामला डीएम, तहसील और राजस्व विभाग की जांच में जाता है तो जमीन सरकारी, नजूल या विवादित निकलती है।

इससे सबसे बड़ा सवाल उन अधिकारियों और जिला स्तरीय समितियों की भूमिका पर है जिन्होंने 2023 में सत्यापन किया था।

- क्या सत्यापन के दौरान राजस्व अभिलेखों की जांच की गई थी?
- क्या भूमि के स्वामित्व और मान्यता के मूल अभिलेखों का परीक्षण हुआ था?
- या सब कुछ जानते हुए भी आंखें बंद कर रिपोर्ट तैयार कर दी गई?

सरकारी खजाने पर चोट

यह मामला सिर्फ मान्यता का नहीं, बल्कि सरकारी अनुदान और वेतन भुगतान से जुड़ा है। यदि किसी संस्था ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अनुदान लिया है, तो जिम्मेदारी सिर्फ प्रबंधन की नहीं, बल्कि उसे सत्यापित करने वाले अधिकारियों की भी तय होनी चाहिए।

अब मांग उठ रही है कि 2023 के पूरे सत्यापन का स्वतंत्र और उच्चस्तरीय पुनरीक्षण कराया जाए और इसकी जांच विजिलेंस और भ्रष्टाचार निवारण संगठन से कराई जाए।

— via Telegram: محمد شعیب رضا فیضی

Reaction dein (0)

Share karein (1)

WhatsApp Facebook X

Comments (0)

पोस्ट के लेखक

🌱 New Reporter ★★★★★
M

Mohammad Atif Raza

📍 Gorakhpur

📰 3 posts 👁 21 views 📊 7 avg/post

News Home ke reporter

Isi Category Me Aur

भारी बारिश के चलते गोरखपुर में 26 सितंबर को कक्षा 1 से 12 तक के सभी स्कूल बंद

Popular Posts

पत्रकारिता लोकतंत्र की रीढ़, कलम की स्वतंत्रता की रक्षा हम सभी की जिम्मेदारी - सरयू राय

👁 35 views

नाना पाटेकर ने पेश की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल, नाती के कान में मदरसे के उस्ताद से दिलवाई अज़ान

👁 35 views

सहारनपुर और बाराबंकी के बाद अब इटावा - सैयद बाबा मजार पर चला बुलडोजर, वक्फ बोर्ड खामोश?

👁 12 views

भारी बारिश के चलते गोरखपुर में 26 सितंबर को कक्षा 1 से 12 तक के सभी स्कूल बंद

👁 12 views

नगर पंचायत इटवा बनी ‘नरक पंचायत’! राजपूत डीहवा रोड पर जलजमाव से ग्रामीण परेशान

👁 12 views