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हनफ़ी फ़िक़्ह के अनुसार ईद-उल-अज़हा की नमाज़ कैसे पढ़ें?

📅 06-11-2026 10:31 PM 👁 21 Readers 💬 0 Comments 🔁 1 Shares
धर्म

भूमिका

ईद-उल-अज़हा मुसलमानों का एक खास त्योहार है। इस दिन मुसलमान ईद की नमाज़ पढ़ते हैं और अल्लाह तआला की खुशी के लिए कुर्बानी करते हैं। यह त्योहार हमें हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की अल्लाह के प्रति आज्ञाकारिता और त्याग की याद दिलाता है।
ईद की नमाज़ का तरीका आम पाँच वक्त की नमाज़ से थोड़ा अलग है। इसमें दो रकअत होती हैं और हनफ़ी फ़िक़्ह के अनुसार छह ज़ाइद तकबीरें कही जाती हैं। पहली बार नमाज़ पढ़ने वालों को अक्सर यह समझने में परेशानी होती है कि तकबीरें कब कहनी हैं और कब रुकू में जाना है। इसलिए इसका सही तरीका जानना जरूरी है।
अल्लाह तआला कुरआन में फ़रमाता है:
فَصَلِّ لِرَبِّكَ وَانْحَرْ
अनुवाद: “अपने रब के लिए नमाज़ पढ़िए और कुर्बानी कीजिए।”
(सूरह अल-कौसर, 108:2)
इस लेख में हनफ़ी फ़िक़्ह के अनुसार ईद-उल-अज़हा की नमाज़ पढ़ने का तरीका और उससे जुड़े जरूरी मसाइल आसान भाषा में बताए गए हैं।

ईद की नमाज़ का समय

ईद-उल-अज़हा की नमाज़ सूरज निकलने के कुछ देर बाद पढ़ी जाती है। इसका समय दोपहर में सूरज ढलने से पहले तक रहता है। इसलिए अपने इलाके में ईद की नमाज़ का समय पहले से मालूम कर लेना चाहिए।
ईद की नमाज़ आम तौर पर ईदगाह या मस्जिद में जमाअत के साथ पढ़ी जाती है। इसमें अज़ान और इक़ामत नहीं होती। इमाम नमाज़ शुरू करता है और बाकी लोग उसके पीछे नमाज़ पढ़ते हैं।
हनफ़ी फ़िक़्ह के अनुसार जिन पुरुषों में ईद की नमाज़ की जरूरी शर्तें पाई जाती हैं, उनके लिए ईद की नमाज़ वाजिब है। महिलाओं के लिए इसका हुक्म अलग है।
(हवाला: अल-हिदाया और रद्दुल-मुहतार, किताबुस्सलात)

नमाज़ से पहले क्या करें?

ईद की नमाज़ के लिए जाने से पहले वुज़ू कर लें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें। बदन, कपड़े और नमाज़ पढ़ने की जगह पाक होनी चाहिए। यदि किसी पर ग़ुस्ल फ़र्ज़ हो, तो पहले ग़ुस्ल करे।
ईद के दिन साफ-सुथरा रहना, अच्छे कपड़े पहनना और समय पर ईदगाह पहुँचना अच्छे कामों में शामिल है। ईद-उल-अज़हा के दिन नमाज़ से पहले कुछ न खाना भी मुस्तहब बताया गया है, खासकर जब व्यक्ति अपनी कुर्बानी के गोश्त से खाना चाहता हो। लेकिन नमाज़ से पहले खाना खा लेने से नमाज़ खराब नहीं होती।
ईदगाह पहुँचकर इमाम के पीछे सही तरीके से खड़े हो जाएँ और नमाज़ शुरू होने का इंतजार करें।
ईद-उल-अज़हा की नमाज़ कैसे पढ़ें?
ईद की नमाज़ दो रकअत होती है। इसमें पहली रकअत में तीन और दूसरी रकअत में तीन ज़ाइद तकबीरें कही जाती हैं। इन्हें याद रखना नमाज़ के तरीके को समझने में बहुत मदद करता है।

पहली रकअत

1. नीयत करें
दिल में इरादा करें कि आप ईद-उल-अज़हा की दो रकअत वाजिब नमाज़ इमाम के पीछे पढ़ रहे हैं। नीयत के लिए कोई खास अरबी वाक्य बोलना जरूरी नहीं है।
2. तकबीर कहकर नमाज़ शुरू करें
इमाम के साथ हाथ उठाकर कहें:
اللّٰهُ أَكْبَرُ
इसके बाद हाथ बाँध लें और सना पढ़ें:
سُبْحَانَكَ اللّٰهُمَّ وَبِحَمْدِكَ، وَتَبَارَكَ اسْمُكَ، وَتَعَالَىٰ جَدُّكَ، وَلَا إِلٰهَ غَيْرُكَ
3. पहली तीन ज़ाइद तकबीरें कहें
सना पढ़ने के बाद इमाम तीन ज़ाइद तकबीरें कहता है। हर तकबीर पर हाथ उठाएँ और फिर छोड़ दें। तीसरी तकबीर के बाद हाथ बाँध लें।
इन तीन तकबीरों के बीच कोई खास दुआ पढ़ना जरूरी नहीं है।
याद रखें: पहली रकअत में तीन ज़ाइद तकबीरें सना के बाद और सूरह फ़ातिहा पढ़ने से पहले होती हैं।
4. कुरआन की क़िराअत करें
इसके बाद इमाम सूरह फ़ातिहा और कोई दूसरी सूरह पढ़ता है। मुक़्तदी यानी इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ने वाले लोग हनफ़ी फ़िक़्ह के अनुसार खुद क़िराअत नहीं करते, बल्कि इमाम की पैरवी करते हैं।
क़िराअत के बाद इमाम रुकू और सज्दे करता है। बाकी लोग भी उसके साथ रुकू और दोनों सज्दे करें।
इस तरह पहली रकअत पूरी हो जाती है।

दूसरी रकअत

पहली रकअत के सज्दों के बाद इमाम दूसरी रकअत के लिए खड़ा होगा।
1. क़िराअत सुनें
इमाम सूरह फ़ातिहा और उसके बाद कोई दूसरी सूरह पढ़ेगा। इसके बाद तीन ज़ाइद तकबीरें कही जाएँगी।
2. दूसरी तीन ज़ाइद तकबीरें कहें
इमाम के साथ तीन बार “اللّٰهُ أَكْبَرُ” कहें। हर बार हाथ उठाकर छोड़ दें।
तीसरी तकबीर के बाद हाथ बाँधने के बजाय छोड़कर रखें।
3. रुकू में जाएँ
अब इमाम चौथी तकबीर कहकर रुकू में जाएगा। यह तकबीर रुकू में जाने के लिए है, छह ज़ाइद तकबीरों में शामिल नहीं है।
इमाम के साथ रुकू करें। फिर रुकू से उठें और दोनों सज्दे करें।
4. आखिरी बैठक और सलाम
दोनों सज्दों के बाद बैठ जाएँ। अत्तहिय्यात, दरूद-ए-इब्राहीमी और दुआ पढ़ें। फिर दाईं और बाईं तरफ सलाम फेरें।
इस तरह ईद-उल-अज़हा की दो रकअत नमाज़ पूरी हो जाती है।

नमाज़ के बाद क्या करें?

ईद की नमाज़ पूरी होने के बाद इमाम ख़ुत्बा देता है। जुमे की नमाज़ में ख़ुत्बा पहले होता है, जबकि ईद की नमाज़ में ख़ुत्बा नमाज़ के बाद होता है।
इसलिए नमाज़ के बाद जल्दबाजी में जाने के बजाय बैठकर ख़ुत्बा सुनना चाहिए। इसमें ईद, कुर्बानी और दूसरी जरूरी धार्मिक बातों के बारे में बताया जाता है।

तकबीर-ए-तशरीक क्या है?

ईद-उल-अज़हा के दिनों में तकबीर-ए-तशरीक पढ़ना भी जरूरी है। हनफ़ी फ़िक़्ह के अनुसार 9 ज़िलहिज्जा की फ़ज्र से 13 ज़िलहिज्जा की असर तक हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद एक बार तकबीर-ए-तशरीक पढ़ना वाजिब है।
इसके शब्द हैं:
اللّٰهُ أَكْبَرُ، اللّٰهُ أَكْبَرُ، لَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ، وَاللّٰهُ أَكْبَرُ، اللّٰهُ أَكْبَرُ، وَلِلّٰهِ الْحَمْدُ
अनुवाद: अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह सबसे बड़ा है और सारी तारीफ़ अल्लाह ही के लिए है।
इसे केवल ईद की नमाज़ के बाद नहीं, बल्कि बताए गए दिनों में हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद पढ़ा जाता है।
(हवाला: मुख़्तसर अल-क़ुदूरी और रद्दुल-मुहतार, किताबुस्सलात)

ईद की नमाज़ में होने वाली आम गलतियाँ

ईद की नमाज़ साल में दो बार आती है, इसलिए कुछ लोगों को इसकी तकबीरों का क्रम याद नहीं रहता। सबसे जरूरी बात यह है कि पहली रकअत में सना के बाद तीन ज़ाइद तकबीरें होती हैं, जबकि दूसरी रकअत में क़िराअत के बाद तीन ज़ाइद तकबीरें होती हैं।
दूसरी गलती जल्दबाजी करना है। नमाज़ में हर काम इत्मीनान से करना चाहिए। इमाम से आगे नहीं बढ़ना चाहिए और उसकी पैरवी करनी चाहिए।
अगर कोई व्यक्ति देर से पहुँचे या उसकी कोई तकबीर छूट जाए, तो उसे अपनी तरफ से अंदाजा लगाकर फैसला नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में इमाम की मौजूदा हालत के अनुसार नमाज़ में शामिल हो और जरूरत पड़ने पर किसी योग्य आलिम से मसला पूछे।

कुर्बानी से जुड़ी जरूरी बात

ईद-उल-अज़हा में नमाज़ और कुर्बानी दोनों महत्वपूर्ण हैं, लेकिन दोनों के अलग-अलग नियम हैं। कुर्बानी के जानवर, उसके समय और दूसरे मसाइल के बारे में सही जानकारी हासिल करनी चाहिए।
कुर्बानी का उद्देश्य केवल जानवर ज़बह करना नहीं, बल्कि अल्लाह के आदेश का पालन करना और उसकी खुशी हासिल करना है। कुर्बानी के गोश्त को अपने परिवार के साथ रिश्तेदारों और जरूरतमंदों तक पहुँचाना भी अच्छी बात है।

निष्कर्ष

ईद-उल-अज़हा की नमाज़ का तरीका समझना मुश्किल नहीं है। इसमें दो रकअत होती हैं और हनफ़ी फ़िक़्ह के अनुसार छह ज़ाइद तकबीरें कही जाती हैं। पहली रकअत में तीन तकबीरें सना के बाद और दूसरी रकअत में तीन तकबीरें क़िराअत के बाद होती हैं। इसके बाद रुकू, सज्दे और आखिरी बैठक के साथ नमाज़ पूरी की जाती है।
नमाज़ के बाद ख़ुत्बा सुनना और ईद के दिनों में तकबीर-ए-तशरीक का ध्यान रखना चाहिए। यदि किसी मसले में उलझन हो, तो किसी भरोसेमंद हनफ़ी आलिम से पूछना बेहतर है।
अल्लाह तआला हमें सही तरीके से नमाज़ अदा करने, अपनी इबादतों को स्वीकार कराने और ईद-उल-अज़हा के संदेश को समझने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

संदर्भ
1. अल-क़ुरआन, सूरह अल-कौसर, 108:2।
2. मुख़्तसर अल-क़ुदूरी, किताबुस्सलात।
3. अल-हिदाया, किताबुस्सलात।
4. रद्दुल-मुहतार, किताबुस्सलात।
5. बहारे शरीअत, ईद की नमाज़ से संबंधित बहस।

लेखक: मोहम्मद रहबर इस्लाम

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