Email Post - 06 Oct 2026
रुखसाना कौसर 20 साल की कमजोर सी लड़की लगती थी पर उसे कमजोर समझना आतंकियों
को भारी पड़ गया था...
इसी सितंबर 2009 को जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के कलसी गांव में 20 वर्षीय
रुखसाना कौसर के घर पर किसी ने दरवाजा खटखटाया...बाहर तीन हथियारबंद आतंकी घर
में घुस गए..और घर में एक रात के लिए पनाह मांगी..
रुखसाना के मातापिता ने बेटी और बेटे को घर में पलंग के नीचे छुपा दिया था
,पर जब रूकसाना के पिता ने उन्हे मना कर दिया तै आतंकी उनके माता पिता को
मारने लगे..
तब रुखसाना ने डर छोड़ दिया अचानक से एक कुल्हाड़ी लेकर आई और एक आतंकी के
गले पर हमला कर दिया...उसका भाई भी इसी संघर्ष में बहन के साथ जुट गया..
रुखसाना ने कुल्हाड़ी से जिस आतंकी पर अचानक हमला किया था वो जैसे ही घायल हुआ
रूकसाना ने उसके हथियार पर कब्जा किया और गोली चला दी...
पर इसके बाद कहानी का रूख ही बदल गया.. जिस आतंकी को रुखसाना ने मारा था, वह
लश्कर का कमांडर अबू ओसामा निकल गया...
उसके मारे जाने के बाद उसके साथियों ने बदला लेने के लिए रुखसाना के परिवार को
फिर से निशाना बनाया और इस हमले के दो दिन बाद फिर से उनके घर पर दो ग्रेनेड
फेंके गए और गोलीबारी की गई...
तब तक रुखसाना और उसका परिवार वो घर छोड़ चुका था...उसे पुलिस सुरक्षा भी मिली
और एंटी टेरेरिस्ट फ्रंट ने उसकी पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाई..
उस लड़की की इस बहादुरी की वजह से 2010 में रुखसाना कौसर और उनके भाई ऐजाज को
कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया..
एक 20 साल की लड़की ने उस रात सिर्फ अपने परिवार की रक्षा नहीं की थी बल्कि
उसने आतंक के सामने हिम्मत की एक मिसाल कायम की थी...
बाद में उसे और उनके भाई अजाज को जम्मू-कश्मीर पुलिस में नौकरी मिली पर तब ये
यह contractual था ,जिसे बाद में स्थायी रूप से पुलिस कांस्टेबल पद टर
नियुक्त कर दिया गया था.. उनके भाई अजाज को भी कांस्टेबल बनाया गया..
कुछ बहादुरी की कहानियां सुनने में भी अच्छी लगती हैं और शेयर करने में भी,ये
कहानी भी उसी में से एक है... तस्वीर में रूकसाना उसी हथियार के साथ है ,जिससे
उसने उस आतंकी को मारा था...
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मोहम्मद शोएब रज़ा निज़ामी फैज़ी एक युवा लेखक, पत्रकार और प्रतिभाशाली आलिम-ए-दीन हैं। आप दो दर्जन से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं।

