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KGMU महाघोटाला: STF की 'आंच' से 'भस्मासुर' तक? किसने छिपाया, कौन बचेगा?

📅 02-11-2026 04:49 PM 👁 32 Readers 💬 0 Comments 🔁 1 Shares
लखनऊ

लखनऊ: KGMU में कथित अवैध धर्मांतरण और लव जिहाद प्रकरण की जांच अब संस्थान की प्रशासनिक जवाबदेही तक पहुंच गई है। STF की जांच रिपोर्ट में पैथोलॉजी, गांधी वार्ड, माइक्रोबायोलॉजी और रेडियोलॉजी समेत कई विभागों में कथित नेटवर्क सक्रिय होने और शिकायतों पर समय से कार्रवाई नहीं किए जाने का जिक्र है।

रिपोर्ट में महिला डॉक्टरों की शिकायतों को नजरअंदाज करने और विभागीय स्तर पर मामले दबाने की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए है। जेल में बंद रेजिडेंट डॉ. रमीजुद्दीन (रमीन) के खिलाफ पहले शिकायतें मिलने के बावजूद समय रहते कार्रवाई न होने से संस्थान के अधिकारियों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे मे हैं। जांच से जुड़े तथ्यों के मुताबिक, पैथोलॉजी विभाग ने एक महिला डॉक्टर की शिकायत मिलने के बाद विभागीय स्तर पर तत्काल कुलपति को जानकारी नही दी गई। एक वरिष्ठ प्रफेसर के अनुसार, ऐसे शिकायत पर विभागाध्यक्ष को तत्काल प्रशासन को अवनत करना चाहिए था। महिला रेजिडेंट के महिला आयोग पहुंचने के बाद ही प्रशासन सक्रिय हुआ। इससे महिला डॉक्टरों की शिकायतों को गंभीरता से लेने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए है।

डॉक्टर-कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
STF की जांच रिपोर्ट में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की कथित भूमिका का भी उल्लेख है। पैथोलॉजी, मेडिसिन, बॉयोकेमिस्ट्री समेत अलग-अलग विभागों से जुड़े लोगों के संबंधों और गतिविधियों की जांच की गई है। रिपोर्ट में कुछ डॉक्टरों के निजी मेडिकल संस्थानों में आर्थिक निवेश और कथित कट्टरपंथी गतिविधियों से जुड़े लोगों के संपर्कों का भी जिक्र किया गया है। हालांकि, इन आरोपों के आधार पर किसी की भूमिका को अंतिम रूप से दोष सिद्ध नहीं माना जा सकता।

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